हिंदू धर्म में होली का त्योहार प्रमुख त्योहारों में से एक है| दो दिनों तक चलने वाले इस पर में पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है|
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है जिसे छोटी होली के नाम से भी जानते हैं और होलिका दहन के ठीक अगले दिन रंग वाली होली मनाते हैं|
इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया तो वही रंग वाली होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने के कारण शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के बीच में असमंजस की स्थिति है तो चलिए आपको बताते हैं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और रंग वाली होली के दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं चंद्र ग्रहण का समय कब से कब तक रहेगा |
इस बार 13 मार्च गुरुवार के दिन होलिका दहन किया जाएगा और पूर्णिमा तिथि 2 दिन रहने के कारण क्योंकि चंद्रोदय का समय 13 मार्च गुरुवार की रात को प्राप्त होगा इसलिए पूर्णिमा का व्रत भी 13 मार्च दिन गुरुवार को रहेगा और अगले दिन यानी 14 मार्च दिन शुक्रवार को पूर्णिमा का स्नान दान किया जाएगा और रंग वाली होली थी इसी दिन खली जाएगी पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी 13 मार्च गुरुवार को सुबह 10:36 से जिनकी समाप्ति 14 मार्च दिन शुक्रवार को दोपहर 12:30 पर होगी क्योंकि 14 मार्च को दोपहर में ही तिथि समाप्त हो रही है और 13 मार्च गुरुवार को भद्राकाल सुबह 10:35 से रात 11:26 तक रहेगा|
और इस बार भद्रा का वास मृत्यु लोक में रहने के कारण यह भद्रा पृथ्वी लोक पर बहुत ही अशुभ रहेगी यही कारण है कि भद्रा काल में होलिका दहन भी नहीं किया जाएगा यहां तक कि होलिका की पूजा भी भद्रा की समाप्ति के बाद ही होगी|
- अब जानिए इस दिन के शुभ मूहर्त के बारे में:-
राहुकाल दोपहर 1:30 से 3:00 तक रहेगा 13 मार्च गुरुवार के दिन प्रात काल पूजा का मुहूर्त सुबह 5:21 से 6:33 तक रहेगा ध्यान रखेगा इस दिन भद्रा लगने से पहले पहले जो भी पूजा पाठ इत्यादि है वह आप कर लीजिएगा| शाम 6:28 से 7:41 तक गोदुली मूहर्त शाम 6:26 से 6:50 तक|चंद्रोदय होगा शाम 5:54 पर बहुत से लोग तो शाम को चंद्रोदय होने पर व्रत खोल लेते हैं लेकिन इस बार क्योंकि भद्रा भी लग रही है और भद्रा के समय शाम की पूजा करना या फिर व्रत खोलना बहुत से लोग अशुभ मानते हैं तो ऐसे लोग भद्राकाल की समाप्ति के बाद व्रत खोल सकते हैं |
और जहां पर भी होलिका जलाई जाती है वहां पर पहले होलिका की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है होलिका दहन से पहले जो भी बर्गुले या बताशे आदि अर्पित किए जाते हैं वैसे तो भद्राकाल की समाप्ति के बाद ही होलिका की पूजा करनी चाहिए अगर आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो तो भद्रा लगने से पहले पहले आप गुरुवार को सुबह-सुबह ही होलिका की पूजा कर सकते हैं फिर रात को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन कर सकते हैं|
धुलंडी के शुभ मूहर्त:-
14 मार्च शुक्रवार को यानी रंग वाली होली के दिन जिस दिन पूर्णिमा का स्थानांतरण रहेगा उसे दिन प्रात काल पूजा मुहूर्त सुबह 5:20 से 6:32 तक रहेगा इस समय आप स्नान भी कर सकते हैं|
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 मिनट से 12:59 तक रहेगा राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगी| होली का पूजन के समय सभी को एक लोटा जल ,कुमकुम, अक्षत गंध, पुष्प ,कच्चा सूत गुड़,साबुत हल्दी ,मूंग ,बताशे गुलाल और नारियल से पूजन करना चाहिए| सूर्यास्त के बाद जो भी शुभ मुहूर्त होता है उसे शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्वलित करती जाती है| और होलिका में अग्नि प्रचलित करने से पहले होलिका दहन करने से पहले होलिका की पूजा की जाती है| जो होलिका दहन से पहले उसके चारों ओर कच्चे सूत को तीन बार परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है फिर एक लोटा शुद्ध जल और अन्य पूजन की जो भी सामग्री होती है| कुमकुम अक्षर पुष्प का पूजा में उपयोग किया जाता है |सुगंधित फूलों का प्रयोग कर पांच उपचार विधि से होलिका का पूजन करके पूजन के बाद जल से अर्क दिया जाता है|
होलिका में कुछ विशेष सामग्रियों की आहुति दी जाती है जैसे कच्चे आम नारियल साथ तरह के धान मूंग चना और चावल आदि और इनके अलावा आप अभी गुलाल भी होलिका में अर्पित करें कि आप अपने विरोधियों को शांत करना चाहते हो तो उनके नाम से लॉन्ग का एक जोड़ा चलती हुई होलिका में प्रचलित करें ऐसा विरोधी शांत होते हैं| और उनसे आपको किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता है इस बार क्योंकि होली का दहन के ठीक अगले दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है |लेकिन क्योंकि यह ग्रहण विदेश में दिखाई देगा भारत में इसका कोई असर नहीं होगा इसलिए आप पूजा पाठ या जो भी काम करना चाहती हूं वह इस दिन कर सकते हैं ध्यान रहे होलिका दहन के बाद होलिका दहन की जो राख होती है उसे अपने घर पर लाकर जरूर रखना चाहिए जिससे बुरी नजर नहीं लगती|